जिस मृग पर कस्तूरी है!

गीत अंश

जंगल जंगल भटकेगा ही
जिस मृग पर कस्तूरी है।
उतने ही हम पास रहेंगे,
जितनी हममें दूरी है।

डॉ. कुंवर बेचैन

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