उस निगाह के बाद!

जनाब कृष्ण बिहारी ‘नूर’ साहब भारत के प्रसिद्ध उर्दू शायरों की फेहरिस्त में शामिल हैं| उनकी बहुत सी ग़ज़लें जगजीत सिंह जी ने और अन्य प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने गाई हैं| जैसे ‘ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता भी नहीं’ और ‘बस एक वक़्त का खंजर मेरी तलाश में है’|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कृष्ण बिहारी नूर साहब की यह ग़ज़ल-

नज़र मिला न सके उससे उस निगाह के बाद।
वही है हाल हमारा जो हो गुनाह के बाद।

मैं कैसे और किस सिम्त मोड़ता ख़ुद को,
किसी की चाह न थी दिल में, तेरी चाह के बाद।

ज़मीर काँप तो जाता है, आप कुछ भी कहें,
वो हो गुनाह से पहले, कि हो गुनाह के बाद।

कहीं हुई थीं तनाबें तमाम रिश्तों की,
छुपाता सर मैं कहाँ तुम से रस्म-ओ-राह के बाद।

गवाह चाह रहे थे, वो मेरी बेगुनाही का,
जुबाँ से कह न सका कुछ, ‘ख़ुदा गवाह’ के बाद।


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********

Leave a comment