
बांचते हम रह गए अंतर्कथा,
स्वर्णकेशा गीत वधुओं की व्यथा,
ले गया चुनकर कंवल, कोई हठी युवराज,
देर तक शैवाल सा हिलता रहा मन।
किशन सरोज
A sky full of cotton beads like clouds

बांचते हम रह गए अंतर्कथा,
स्वर्णकेशा गीत वधुओं की व्यथा,
ले गया चुनकर कंवल, कोई हठी युवराज,
देर तक शैवाल सा हिलता रहा मन।
किशन सरोज
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