
सुर्ख होठों पे उफ़ ये हँसी मदभरी
जैसे शबनम अंगारो की मेहमान हो
जादू बुनती हुई ये नशीली नज़र
देख ले तो खुदाई परेशान हो
मुस्कुराओ न ऐसे
मुस्कुराओ न ऐसे चुराकर नज़र
आइना देख सूरत मचल जाएगा|
नई उम्र की नई फसल
A sky full of cotton beads like clouds

सुर्ख होठों पे उफ़ ये हँसी मदभरी
जैसे शबनम अंगारो की मेहमान हो
जादू बुनती हुई ये नशीली नज़र
देख ले तो खुदाई परेशान हो
मुस्कुराओ न ऐसे
मुस्कुराओ न ऐसे चुराकर नज़र
आइना देख सूरत मचल जाएगा|
नई उम्र की नई फसल
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