
पतला है हाल-ए-अपना, लेकिन लहू है गाढ़ा
फौलाद से बना है, हर नौजवाँ हमारा|
मिल-जुलके इस वतन को, ऐसा सजायेंगे हम
हैरत से मुँह तकेगा सारा जहाँ हमारा|
चीन-ओ-अरब हमारा …
वो सुबह कभी तो आएगी
A sky full of cotton beads like clouds

पतला है हाल-ए-अपना, लेकिन लहू है गाढ़ा
फौलाद से बना है, हर नौजवाँ हमारा|
मिल-जुलके इस वतन को, ऐसा सजायेंगे हम
हैरत से मुँह तकेगा सारा जहाँ हमारा|
चीन-ओ-अरब हमारा …
वो सुबह कभी तो आएगी
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