
तालीम है अधूरी, मिलती नही मजूरी
मालूम क्या किसीको, दर्द-ए-निहाँ हमारा
चीन-ओ-अरब हमारा …
फिर सुबह होगी
A sky full of cotton beads like clouds

तालीम है अधूरी, मिलती नही मजूरी
मालूम क्या किसीको, दर्द-ए-निहाँ हमारा
चीन-ओ-अरब हमारा …
फिर सुबह होगी
Leave a comment