
खोली भी छिन गई है, बेन्चें भी छिन गई हैं
सड़कों पे घूमता है अब कारवाँ हमारा
जेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गाली
वो सन्तरी हमारा, वो पासबाँ हमारा
चीन-ओ-अरब हमारा …
फिर सुबह होगी
A sky full of cotton beads like clouds

खोली भी छिन गई है, बेन्चें भी छिन गई हैं
सड़कों पे घूमता है अब कारवाँ हमारा
जेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गाली
वो सन्तरी हमारा, वो पासबाँ हमारा
चीन-ओ-अरब हमारा …
फिर सुबह होगी
Leave a comment