बंदिश निगल न जाए कहीं!

वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है
मेरे बयान को बंदिश निगल न जाए कहीं|

दुष्यंत कुमार

2 responses to “बंदिश निगल न जाए कहीं!”

  1. वाह वाह..

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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