दर्द पुराने निकले 5

कू -ए- क़ातिल में चले जैसे शहीदों का जुलूस,
ख़्वाब यूं भीगती आँखों को सजाने निकले|

अमजद इस्लाम अमजद

2 responses to “दर्द पुराने निकले 5”

  1. वाह, बहुत सुन्दर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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