
ढल चुकी है रात कब की, उठ गई महफ़िल,
मैं कहाँ जाऊं नहीं मेरी कोई मंजिल,
दो क़दम मुश्किल है चलना
मैं नशे में हूँ!
A sky full of cotton beads like clouds

ढल चुकी है रात कब की, उठ गई महफ़िल,
मैं कहाँ जाऊं नहीं मेरी कोई मंजिल,
दो क़दम मुश्किल है चलना
मैं नशे में हूँ!
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