तू भी सो जा, सो गई रंग भरी शाम!

आज जनकवि शैलेन्द्र जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ| अभी 30 अगस्त को ही उनकी जन्मतिथि थी| शैलेन्द्र जी राजकपूर जी की टीम में थे और उन्होंने उनकी फिल्मों के लिए और अन्य कलाकारों के लिए भी अनेक यादगार गीत लिखे|

शैलेन्द्र एक ऐसे सृजनशील रचनाकार थे जिनको फिल्मी दुनिया की चकाचौंध बिल्कुल प्रभावित नहीं कर पाई| उन्होंने अपने गीतों में सामान्य जन के भावों को अभिव्यक्त किया और अंत में फणीश्वर नाथ रेणु जी की कहानी पर ‘तीसरी कसम’ फिल्म बनाई जिसे बनाना बहुत साहस की बात थी, इस फिल्म को अनेक पुरस्कार मिले लेकिन उस समय परदे पर यह फिल्म सफल नहीं हुई और शायद इसका धक्का ही उनके लिए प्राणघातक सिद्ध हुआ|

लीजिए आज उस महान रचनाकार की स्मृति में प्रस्तुत है उनका यह गीत, जो 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘बेटी-बेटे, में फिल्माया गया था –


आज कल में ढल गया
दिन हुआ तमाम
तू भी सो जा सो गई
रंग भरी शाम|

साँस साँस का हिसाब ले रही है ज़िन्दगी
और बस दिलासे ही दे रही है ज़िन्दगी
रोटियों के ख़्वाब से चल रहा है काम|
तू भी सोजा ….

रोटियों-सा गोल-गोल चांद मुस्‍कुरा रहा
दूर अपने देश से मुझे-तुझे बुला रहा
नींद कह रही है चल, मेरी बाहें थाम|
तू भी सोजा…


गर कठिन-कठिन है रात ये भी ढल ही जाएगी
आस का संदेशा लेके फिर सुबह तो आएगी
हाथ पैर ढूंढ लेंगे , फिर से कोई काम|
तू भी सोजा…


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 responses to “तू भी सो जा, सो गई रंग भरी शाम!”

  1. sabhi kavi aur shayaron ke geet jo aap share karte hai ,are immortal!loved it !thanks again !

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji.

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