विख्यात फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी जी एक अच्छी शायरा भी थीं और कविता की कद्रदान भी थीं| वास्तव मेँ कवि नीरज जी को फिल्मी दुनिया मेँ ले जाने वाली भी वही थीं |

आज मैं मीना कुमारी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ-, प्रस्तुत है यह ग़ज़ल-
चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा,
दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा|
बुझ गई आस, छुप गया तारा,
थरथराता रहा धुआँ तन्हा|
ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं,
जिस्म तन्हा है और जाँ तन्हा|
हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी,
दोनों चलते रहें कहाँ तन्हा|
जलती-बुझती-सी रोशनी के परे,
सिमटा-सिमटा-सा एक मकाँ तन्हा|
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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